Wednesday, March 5, 2008

चेतना और बुद्धि

बुद्धि (intellect )और चेतना (consciousness)एक नहीं हैं । दोनों में बहुत गहरा नाता है ,इतना गहरा कि दोनों की निकटता सुभिन्नता को मिटा देती है ।बुद्धि समझ का औज़ार है और चेतना इन सबकी साक्षी है । चेतना साक्षी मात्र है । चेतना अपरिवर्तनशील है । बुद्धि परिवर्तनशील है । और समझ तो बदलती ही रहती है । बुद्धि और समझ तो और निकट है । लेकिन एक फ़िर भी नहीं हैं । रोबोटिक्स के विकास साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial intelligence ) पर शोध कार्य बढ़ गया है ।अब ऐसे रोबोट बनने लगे हैं जो देख कर सीख सकते हैं । और यह सब कुछ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बल पर ही हो रहा है । 'सीखना' जो की अनन्य रूप से मष्तिष्क का एक प्रकार्य माना जाता था अब रोबोट्स के बस के बाहर नहीं है । लेकिन रोबोट चेतन मशीन नहीं है । रोबोट 'महसूस'(sense) भी कर सकते हैं लेकिन केवल डाटा के रूप में । वास्तव में 'महसूस' शब्द का प्रयोग उपयुक्त नहीं है । लेकिन वैज्ञानिक शब्दावली में sense ,sensor....जैसे शब्दों का ही प्रयोग किया जाता है । हम यहाँ 'वेदना ' शब्द का प्रयाग करेंगे । यह भी एक तकनीकी शब्द(भारतीय दर्शन विशेषकर बौद्ध में में प्रयुक्त ) ही है जिसका अर्थ है 'इन्द्रियानुभाव से मिलने वाला उद्दीपन '। यहाँ 'वेदना' केवल दर्द के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया है(जैसा की सामान्यतः होता है )।
......................क्रमशः

Sunday, March 2, 2008

चेतना की समस्या -

भारत में चेतना पर विमर्श की प्राचीन परम्परा रही है कुछ बात है यहाँ की मिट्टी में जो एक आध्यात्मिक प्रेरणा से लबरेज़ है यह प्रेरणा सत्य की खोज का एक उत्प्रेरक बन जाती है पतंजली का इस विषय पर किया गया कार्य अत्यन्त महत्वपूर्ण है। यहाँ एक बात उल्लेखनीय है कि भारतीय दर्शन की विभिन्न शाखाओं में कभी -कभी अन्तर करना कठिन हो जाता है क्योंकि यहाँ विकास पाश्चात्य दर्शन की तरह क्रमबद्ध रूप से विकसित नहीं हुआ ,यहाँ तो सब शाखाएं समानांतर चलती हैं यद्यपि सभी में कुछ मूल विशेषताएं हैं लेकिन जुड़ाव अधिक प्रबल है
सांख्य का वेदान्त पर गहरा प्रभाव है सूक्ष्मता से देखने पर ठीक ऐसा ही प्रभाव पतंजलि का बौद्ध एवं जैन दर्शन पर देखा जा सकता है पतंजलि तो केवल एक प्रतिनिधि नाम है इसका श्रेय तो प्राचीन काल से चले रहे मनीषियों के संयुक्त प्रयासों को जाता है
भारतीय दर्शन या पतंजलि 'चित्' अथवा चेतना के बारे में क्या कहते हैं इस पर आगे अलग से विचार किया जाएगा ,हम यहाँ चेतना की प्रकृति और उसे जानने में आने वाली समस्या पर चर्चा करेंगे