बुद्धि (intellect )और चेतना (consciousness)एक नहीं हैं । दोनों में बहुत गहरा नाता है ,इतना गहरा कि दोनों की निकटता सुभिन्नता को मिटा देती है ।बुद्धि समझ का औज़ार है और चेतना इन सबकी साक्षी है । चेतना साक्षी मात्र है । चेतना अपरिवर्तनशील है । बुद्धि परिवर्तनशील है । और समझ तो बदलती ही रहती है । बुद्धि और समझ तो और निकट है । लेकिन एक फ़िर भी नहीं हैं । रोबोटिक्स के विकास साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial intelligence ) पर शोध कार्य बढ़ गया है ।अब ऐसे रोबोट बनने लगे हैं जो देख कर सीख सकते हैं । और यह सब कुछ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बल पर ही हो रहा है । 'सीखना' जो की अनन्य रूप से मष्तिष्क का एक प्रकार्य माना जाता था अब रोबोट्स के बस के बाहर नहीं है । लेकिन रोबोट चेतन मशीन नहीं है । रोबोट 'महसूस'(sense) भी कर सकते हैं लेकिन केवल डाटा के रूप में । वास्तव में 'महसूस' शब्द का प्रयोग उपयुक्त नहीं है । लेकिन वैज्ञानिक शब्दावली में sense ,sensor....जैसे शब्दों का ही प्रयोग किया जाता है । हम यहाँ 'वेदना ' शब्द का प्रयाग करेंगे । यह भी एक तकनीकी शब्द(भारतीय दर्शन विशेषकर बौद्ध में में प्रयुक्त ) ही है जिसका अर्थ है 'इन्द्रियानुभाव से मिलने वाला उद्दीपन '। यहाँ 'वेदना' केवल दर्द के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया है(जैसा की सामान्यतः होता है )।
......................क्रमशः
Wednesday, March 5, 2008
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