चेतना(consciousness)पर यह ब्लॉग आरम्भ किया था । परन्तु फिलहाल कुछ समय के लिए 'चेतना की समस्या' को विराम देने जा रहा हूँ ,क्योंकि यह विषय ही कुछ ऐसा है कि अत्यधिक गंभीरता ,समय और ईमानदारी चाहता है।
गंभीरता और ईमानदारी तो मेरे पास है लेकिन समय की कमी है ।
वांछित शोध ,अध्ययन और मनन के उपरांत मैं पुनः इस विषय को आपके समक्ष लाने का वादा करता हूँ।अब इस ब्लॉग पर अन्य दार्शनिक और बौद्धिक विषयों के साथ आपसे मुखातिब होऊंगा ।घबराएँ नहीं विषय गंभीर भले हो लेकिन भाषा और लहजा बहुत सरल और मधुर रखने का प्रयास करूँगा । ....और फ़िर जीवन में बहुत संजीदा कुछ होता भी नहीं है ,स्वयं जीवन भी ।
हम आचरण से चोर जो होते हैं ।
कायर तो हम सभी हैं लेकिन कोई ख़ुद से इतनी दगा तो न करे कि आईने से नज़रें चुरानी पड़ें । खैर मुझे विषय से भटकना नहीं चाहिए ।
आपसे एक दिली गुजारिश है कि अपनी राय और सुझावों से निरंतर मेरा मार्गदर्शन करते रहें ।
Tuesday, October 7, 2008
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